इस वायरस की दवा वैक्सीन नहीं, योग है

इस वायरस की दवा वैक्सीन नहीं, योग है

कोरोनाकाल में सेक्स की लत बड़ी समस्या बनकर उभरी है। अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल मौजूदा संकट को अवसर के रूप में तब्दील करने में करना था। पर ऊर्जा का अपव्यय हो गया। कंपल्सिव सेक्शुअल बिहेवियर यानी बाध्यकारी यौन व्यवहार चिंता का विषय बन गया। रामचरित मानस में एक प्रसंग है, लक्ष्मण जी कहते हैं – काहु न कोउ सुख -दु:ख कर दाता, निज कृत करम भोग सबु भ्राता यानी कोई किसी को सुख-दुःख का देने वाला नहीं है। सब अपने ही किए हुए कर्मों का फल भोगते हैं। आधुनिक मनोवैज्ञानिक भी संचित कर्मों के फल मिलने की बात प्रकारांतर से स्वीकार करते हैं। पर साथ ही कहते हैं कि हमारे कर्मों के कारण जो सुख-दु:ख निर्मित होता है, मौजूदा जीवन में उसका असर कितना होगा, यह इस बात पर निर्भर होता है कि हम किसी भी समस्या का समाधान कितनी तत्परता से और कितने सूझ-बूझ के साथ करते हैं। हम सब दैनिक जीवन में ऐसा महसूस भी करते हैं। पर हमारे दिमाग में यदि कोई ऐसा वायरस है, जो सोचने-समझने की शक्ति खत्म कर देता है तो विश्वव्यापी संकट का कुप्रभाव ज्यादा गहरा होने से कौन रोक सकता है?  

सिद्धासन, सिद्धयोनि आसान और मूलबंध। इन यौगिक क्रियाओं की बात आते ही ऐसा लगता है मानो आध्यात्मिक जागरण की बात शुरू होने वाली है। पर नहीं, इस बार आध्यात्मिक जागरण की बात हाशिए पर है। बात एक ऐसी महामारी की होनी है, जो कोरोना से कम खतरनाक नहीं है। फर्क इतना कि कोरोना वायरस का खौफ है। पर इस वायरस से लोगों को प्रेम हो गया है। यह है सेक्स अडिक्शन यानी सेक्स की लत। जी हां, आपने सही सुना। पूरे लॉकडाउन के दौरान ज्यादातर लोगों ने घरों में दुबक कर कोरोना वायरस से अपना बचाव करने का तो भरपूर इंतजाम किया। पर इस वायरस से मन-मंदिर को बीमार होने दिया। ज्यादातर मामलों में इसकी परिणति कंपल्सिव सेक्शुअल बिहेवियर के रूप में हुई। हालात ऐसे बने हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को भी इसकी चिंता करनी पड़ गई है।

जानकर हैरानी होगी कि भारत लॉकडाउन के दौरान अश्लील वेबसाइट्स के ट्राफिक के मामले में अमेरिका और इंग्लैंड के बाद तीसरे स्थान पर था। सरकार ने साढ़े तीन हजार अश्लील बेवसाइट्स को प्रतिबंधित कर दिया। बावजूद भारत कनाडा को पछाड़कर तीसरे पायदान पर पहुंच गया। महिलाओ ने भी इस मामले में पिछले तमाम रिकार्ड तोड़ दिए। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अश्लील वेबसाइट्स पर जाने वालों में तीस फीसदी महिलाएं थीं। चिंताजनक बात यह कि बच्चों की भी ऐसी वेबसाइट्स तक पहुंच बनी। संकट काल में शरीर की ऊर्जा का उपयोग सकारात्मक कार्यों के लिए करना था। पर दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हो सका। महर्षि पतंजलि ने कहा है – योगश्चित्तवृत्ति निरोध: यानी चित्त वृत्तियों का निरोध ही योग है। कोरोना संकट आया और मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ने लगी तो योगाचार्यों ने ध्यान साधना पर काफी जोर दिया। ताकि चित्त वृत्तियों का निरोध हो सके। मन-मंदिर को विश्रांत किया जा सके। तब किसी ने सोचा भी न था कि दूसरी तरह का मनसिक रोग भी खतरनाक रूप लेगा।

इस वायरस का इलाज योग से ही संभव है। पुरूषों के लिए सिद्धासन, महिलाओं के लिए सिद्धयोनि आसान और सबके लिए मूलबंध असरदार साबित होंगे। पहले आमतौर पर इन यौगिक क्रियाओं को केवल और केवल ब्रह्मचर्य धारण करने वालों, आध्यात्मिक साधकों के लिए ही उपयुक्त माना जाता था। कैवल्यधाम, लोनावाला के संस्थापक स्वामी कुवल्यानंद और बिहार योग विद्याल के संस्थापक परमहंस स्वामी सत्यानंद सररस्वती ने सिद्धासन, सिद्धयोनि आसन को लेकर भ्रांतियां दूर की। इसके साथ ही स्वामी सत्यानंद सररस्वती ने मूलबंध पर विस्तृत शोध करके पुस्तक लिखी तो योग विद्या मानो फिर से परिभाषित हो गई। देश-विदेश में अनेक शोध किए गए तो गृहस्थों के लिए भी इनकी उपयोगिता साबित हुई।

स्वामी कुवल्यानंद की योगासन पर लिखी गई एक पुस्तक में सिद्धासन को लेकर उनकी अवधारणा की बड़ी स्पष्टता के साथ व्याख्या है। एक बात बता दूं कि स्वामी कुवल्यानंद बड़े वैज्ञानिक योगी थे और अपने शरीर को प्रयोगशाला की तरह उपयोग में लाया करते थे। उनकी बातें विज्ञान की कसौटी पर कसी हुई होती हैं। खैर, उन्होनें अपनी पुस्तक में कहा है – “योग संबंधी कुछ देशी पुस्तकों में उल्लेख है कि सिद्धासन या सिद्धयोनि आसन से काम-शक्ति पर अहितकर प्रभाव पड़ता है। पर मेरी नजर में ऐसा एक भी मामला नहीं आया। हां, यह जरूर है कि योग्य योगाचार्य से मार्ग-दर्शन लेकर ही अधिकतम एक घंटे तक इन आसनों का अभ्यास किया जाना चाहिए।“ 

पहले मूलबंध के फायदे समझते हैं। स्वामी सत्यानंद सरस्वती की पुस्तक “मूलबंध-द मास्टर की” के मुताबिक मूलबंध अन्य योग-क्रियाओं की तरह केवल एक क्रिया मात्र नहीं है। कुंडलिनी जागरण में इसका बड़ा महत्व है। यह शरीर और मन को विश्रांत करने की शक्तिशाली विधि है। तभी सिजोफ्रेनिया के मरीजों को भी काफी लाभ मिलता है। यदि शरीर स्वस्थ है तो परानुकंपी व तंत्रिका-तंत्र की क्रियाशीलता बढती है। साथ ही श्वसन गति, हृदय गति और रक्तचाप नियंत्रित होता है। ऐसा अल्फा, बीटा, थीटा जैसे मानसिक तरंगों के स्थिर हो जाने के कारण होता है। यौन समस्याओं के समाधान और स्वस्थ यौन संबंधों को बनाए रखने व उनके संपोषण में अहम् भूमिका को कई स्तरों पर परखा जा चुका है। टेस्टोस्टेरोन स्राव व शुक्र निर्माण नियंत्रित होने से कमोत्तेजना शांत होती है। महिलाओं की रजोनिवृत्ति के बाद की समस्याओं का समाधान भी होता है।

बिहार योग विद्यालय के निवृत परमाचार्य परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने घेरंड संहिता के अपने भाष्य में मूलबंध की चर्चा करते हुए उसका नाड़ियों पर प्रभाव का विश्लेषण कुछ इस तरह किया है – प्राचीन काल की यह गुप्त विद्या इतनी शक्तिशाली है कि इससे वृद्धावस्था नष्ट होती है। यानी वृद्धावस्था को अधिक समय तक टालना संभव हो पाता है। यदि मूलाधार चक्र को मेरूदंड के निचले भाग में स्थित मानें तो मस्तिष्क के भीतर भी एक ऐसा केंद्र होता है जो मूलाधार के स्पंदन से प्रभावित होकर जाग्रत होता है। नाड़ियों से होकर संवेदना मस्तिष्क तक जाती है औऱ मस्तिष्क के उसी क्षेत्र को जाग्रत करती है, जिसका संबंध मूलाधार से है। इसी काऱण शरीर के निचले भाग में अपान वायु के प्रवाह की दिशा भी बदल जाती है। प्राण-शक्ति का संरक्षण होता है और लंबी आयु मिलती है। मूलबंध से ऐसी शक्ति मिलती है कि इससे चाहे तो पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन कर सकते हैं और चाहें तो भौतिक संबंध बना सकते हैं। यानी इस मामले में सब कुछ अपने नियंत्रण में और इंद्रियों के दास बने रहने से मुक्ति।

अब सिद्धासन और सिद्धयोनि आसनों की बात। आधुनिक योग की आयंगार शैली के जनक बीकेएस आयंगार ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक “लाइन ऑन योगा” में 84 लाख आसनों में सिद्धासन को महत्वपूर्ण माना है। अय्यंगार के मुताबिक, “ सिद्ध के समान आसन नहीं, केवल के समान कुंभक नहीं, खेचड़ी के समान मुद्रा नहीं और नाद के समान लय (मन की लयता) नहीं।“ योग के अनेक ग्रंथों में इस बात का उल्लेख है कि प्राचीनकाल में भी जितने भी सिद्ध योगी हुए, प्राय: सिद्धासन में बैठकर ही साधना किया करते थे। जापान में इस आसन की लोकप्रियता इतनी हुई है कि उसके आधार पर दारूमा डॉल्स बनाए जाने लगे। उस खिलौने की खासियत है कि उसे चाहे जिस तरह भी रख दें, सिद्धासन की मुद्रा में बैठ जाएगा। ऐसा उसमें भरे गए पारे के कारण होता है। अब तो हृदय रोग के अनेक चिकित्सक हृदय कार्यों में स्थिरता लाने के लिए सिद्धासन करने की सलाह देने लगे हैंं।

हम जानते हैं कि गुरूत्वाकर्षण के कारण पृथ्वी प्राण-शक्ति को नीचे की तरफ खींचती है। पर मेरूदंड, रीढ़ औऱ मस्तिष्क एक सीध में रहे और मूलबंध व प्राणायाम के कारण प्राण-शक्ति ऊर्ध्वगामी हो जाती है। शरीर के दो छोर हैं – नीचे है मूलाधार। इसे काम-केंद्र कह सकते हैं और ऊपर है सहस्रार। योगशास्त्र में कहा गया है कि जानवरों के लिए मूलाधार चक्र श्रेष्ठ होता है। पर मानव के लिए यह सबसे निचला पायदान है। ज्यादातर लोगों के जीवन पर इस चक्र का खासा प्रभाव होता है। लिहाजा, बिना किसी प्रयास के काम-शक्ति उपलब्ध होती है। प्राण-शक्ति का ह्रास होते रहता है। योग साधना करके ही शक्ति संचय हो पाता है। इसलिए योग प्राणिक ऊर्जा को ऊर्ध्वगामी बनाने की बात करता है। जब सिद्धासन में शरीर पर गुरूत्वाकर्षण का प्रभाव कम होता है तो इस प्रयास में सफलता मिलने लगती है।        

वैज्ञानिकों ने सिद्धासन के अभ्यासियों का अध्ययन किया तो पाया कि उनके शरीर से ऊर्जा का ह्रास बहुत ही कम हो रहा था। ऊर्जा का ज्यादा भाग शरीर में ही संरक्षित हो रहा था। ऐसा इसलिए भी कि इस साधना से स्वत: मूलबंध लग रहा था। सिद्धयोनि आसन के लाभ भी सिद्धासन जैसे ही दिखे।आमतौर पर योगासनों के दौरान गुरूत्वाकर्षण के कारण शरीर से काफी मात्रा में ऊर्जा का ह्रास होता है। सिद्धासन में बैठे लोगों में मामले में पाया गया कि ऊर्जा शरीर के भीतर एक वार्तुल में घूमती रहती थी। वर्तुल पूरा होते ही यह चक्राकार घूमने लगती थी।

योग विज्ञानियों के मुताबिक, ऊर्जा ऊपर की तरफ उठने से स्वाभाविक रूप से कामवासना को लेकर मन में विचार उठने बंद होते हैं। मन-मस्तिष्क उच्चतम स्तर पर काम करने लगता है। चूंकि शरीर के सभी चक्र स्वतंत्र रूप से काम करते हैं। इसलिए मूलबंध का भी परिणाम देने वाले सिद्धासन में बैठकर प्राणायाम किया जए तो मूलाधार चक्र का जागरण होने की संभावना बढ़ जाती है, जिसका असर सहस्रास चक्र तक होता है, जिसे परम चेतना का स्थान माना जाता है। इन तथ्यों के आधार पर कहा जा सकता है कि केवल सिद्धासन की साधना भी इस तरह की जाए कि मूलबंध लग जाए तो सेक्स अडिक्शन और कंपल्सिव सेक्शुअल बिहेवियर से मुक्ति मिल जाएगी।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार तथा योग विज्ञान विश्लेषक हैं।)

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12 August 2020 श्रीकृष्ण की बांसुरी, गोपियां और स्वामी सत्यानंद की दिव्य-दृष्टि

रासलीला, श्रीकृष्ण की बांसुरी, उसकी सुमधुर धुन और गोपियां.... इस प्रसंग में बीती शताब्दी के महानतम संत परमहंस स्वामी सत्यानंद...

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10 August 2020

आधुनिक विज्ञान को भी भा रहा है गीता का ज्ञान। वजह स्थापित मान्यताएं नहीं, बल्कि वैज्ञानिक शोधों के परिणाम हैं।...

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05 August 2020 भक्ति योग और रामायण के यौगिक संदेश

भारत के योगियों औऱ संत-महात्माओं ने श्रीराम की शिक्षाओं को दो अलग-अलग संदर्भों में देखा है। एक है भक्ति मार्ग...

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04 August 2020 योग प्रशिक्षकों के लिए कोरामिन की तरह है यह खबर

देश के योग साधकों का मूड बदल रहा है। उन्हें ऑनलाइन योग प्रशिक्षण ही भा रहा है। इसकी सबसे बड़ी...

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03 August 2020 मध्य प्रदेश के हर स्कूल में होगा एक योग प्रशिक्षक

मध्यप्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में एक विषय के तौर पर योग भी होगा। कोविड-19 से संक्रमित मुख्यमंत्री चौहान ने वीडियो...

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02 August 2020 नई शिक्षा नीति : कसरती स्टाइल के योग से नहीं, समग्र योग से बनेगी बात

धीरेंद्र ब्रह्मचारी केंद्रीय विद्यालयों में योग शिक्षकों की बहाली के लिए खुद ही इंटरव्यू ले रहे थे। तभी एक घटना...

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27 July 2020 नेति और कुंजल : ये हैं कोरोना के विरूद्ध अग्रिम पंक्ति की यौगिक सेनाएं

प्राचीनकाल से योगमार्ग पर आगे बढ़ने के लिए ऋषियों ने षट्कर्म की जिन क्रियाओं को प्रथमत: अनिवार्य माना था, उनमें...

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23 July 2020 अदालत का फैसला सही, योग के मामले में सरकार अपना काम करे

इसमें दो मत नहीं कि केंद्र की मोदी सरकार योग के मामले में उल्लेखनीय काम कर रही है। अब तक...

Post by : Kishore Kumar
21 July 2020 100 योगासन तीन मिनट में !

दुबई की रहने वाली  भारतीय मूल की एक लड़की ने कमाल कर दिया। उसने एक छोटे से बॉक्स में तीन...

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19 July 2020 ऐसे पुनर्जीवित होगा स्वास्थ्य पर्यटन

कोरोना महामारी से बुरी तरह प्रभावित वेलनेस टूरिज्म सेक्टर को किस तरह पुनर्जीवित किया जाए, यह चिंता का सबब बना...

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19 July 2020 अब अमेरिका ने भी कहा – फिलहाल योग ही सहारा

अब अमेरिकी शोध संस्थानों ने भी कहा – कोविड-19 के वैक्सीन आने तक योग ही सहारा है। योग और ध्यान...

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19 July 2020 कोरोना, डेंगू, चिकनगुनिया और स्वामी रामदेव

कोरोना महामारी कहर बरपा ही रही है। बरसात शुरू होते ही अब डेंगू और चिकनगुनिया ने भी दस्तक दे दी...

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18 July 2020 सरकार ने भी माना, फिलहाल योग ही सहारा

भारत सरकार ने प्रकारांतर से स्वीकार कर लिया है कि वैक्सीन आने तक कोविड-19 से मुकाबला करने के लिए योग...

Post by : Kishore Kumar
18 July 2020 शवासन में योग कारोबार, शीर्षासन करते योग प्रशिक्षक

ऑनलाइन योग कारोबार भले चमकता हुआ दिख रहा है। पर इस चमक के पीछे छिपा है योग प्रशिक्षकों का बेबस...

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08 July 2020 वेद, पुराण, विज्ञान और टाइम मशीन

विज्ञान के इस युग में क्या ऐसा समय आएगा कि हमारे पास ऐसी टाइम मशीन होगी कि हम अपनी उम्र...

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06 July 2020 नींद की गोली न बनाएं इन योग विधियों को

भक्तिकाल के महान संत अब्दुल रहीम ख़ान-ए-ख़ानाँ उर्फ रहीम का एक प्रसिद्ध दोहा है – “रहिमन देखि बड़ेन को, लघु...

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05 July 2020 योग पत्रकारिता का उषाकाल

गुरू पूर्णिमा के मौके पर "उषाकाल" बेवसाइट आप सबके समक्ष औपचारिक रूप से प्रस्तुत करते हुए खुशी हो रही है।...

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03 July 2020 भारत में परंपरागत योग के दिन फिरे

किशोर कुमार // अपने देश में योग की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव हो रहा है। अब वह दिन लदने को...

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03 July 2020 कैंसर रोगियों के इलाज में योग का बढ़ता दबदबा

किशोर कुमार // योगाभ्यासों के जरिए कैंसर जैसी घातक बीमारी को काबू में करने के दिशा में हम एक-दो कदम...

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03 July 2020 महामृत्युंजय मंत्र : हंगामा है क्यों बरपा?

 किशोर कुमार // दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल के एक चिकित्सक ने महामृत्युंजय मंत्र की शक्ति से न्यूरो चिकित्सा करने...

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03 July 2020 अनेक बीमारियों की एक दवा – “अजपा जप” योग

किशोर कुमार // अजपा जप योग को लेकर विश्व के अनेक शोध संस्थानों में हुए शोधों के निष्कर्ष चौंकाने वाले...

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03 July 2020 महर्षि रमण के बहाने ध्यान साधना की बात

इंग्लैंड के खोजी पत्रकार पॉल ब्रंटन पूर्वी जगत की आध्यात्मिक परंपराओं की खोज करते हुए रमणाश्रम पहुंच गए और महर्षि...

Post by : Kishore Kumar
03 July 2020 अपने जीवन रूपी बगीचे के माली बनिए

परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती // आधुनिक यौगिक व तांत्रिक पुनर्जागरण के प्रेरणास्रोत तथा इस शताव्दी के महानतम संत परमहंस स्वामी...

Post by : Kishore Kumar
03 July 2020 मन और योग साधना

परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती // योगी की दृष्टि में सौ फीसदी बीमारी मन से उत्पन्न होती है। यह ठीक है कि...

Post by : Kishore Kumar
11 June 2020 उच्च रक्तचाप के पालनहार हैं? योग-निद्रा है न !

यदि आप गलत जीवन शैली की वजह से उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन के शिकार हो चुके हैं तो कुछ कीजिए...

Post by : Kishore Kumar
22 May 2020 कोरोना योद्धा बने भारत के योगी

देश के योग संस्थान और योगी कोरोना महामारी के विरूद्ध योद्धा बनकर मानवता की सेवा में जुटे हुए हैं। वे...

Post by : Kishore Kumar
22 May 2020 सहज योग विधियों के अद्भुत नतीजे

कोरोना काल में सर्वत्र अज्ञात डर व भय का माहौल है। इस खतरनाक मनोदशा से पूरी दुनिया चिंतित है। ओशो...

Post by : Kishore Kumar
11 May 2020 खेल बिगाड़ते योग के नीम हकीम

आसनो में भुजंगासन को सर्वरोग विनाशनम् कहा गया है। दुनिया के अनेक भागों में इस पर अनुसंधान हुआ तो पता...

Post by : Kishore Kumar
28 January 2020 कोरोना महामारी से दो-चार होते हृदय रोगी

योगनिद्रा में हाइपोथैलेमस ग्रंथि परानुकंपी नाड़ी संस्थान द्वारा दिल तक पहुंचने वाले विद्युत फाइबर्स को तनाव दूर करने के संकेत...

Post by : Kishore Kumar
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