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योगियों के महायोगी स्वामी शिवानंद सरस्वती

दक्षिण भारत के प्रतिष्ठित अप्पय्य दीक्षितार कुल में जन्मे और परदेश में अपनी चिकित्सा की धाक् जमाने वाले कुप्पू स्वामी पर किसी अदृश्य शक्ति का ऐसा जादू चला कि वे तमाम भौतिक सुखों को त्याग कर कठिन साधानाओं की बदौलत स्वामी शिवानंद सरस्वती बन गए थे। उनमें अद्भुत योग-शक्तियां थीं। वे एक ही समय अलग-अलग देशों में कई शरीर धारण कर सकते थे और खेचड़ी मुद्रा का प्रयोग करके हवा में उड़ सकते थे। पर वे इसे आत्म-ज्ञानियों के लिए मामूली बात मानते थे। उन्हें इस बात का हमेशा मलाल रहा कि संन्यास मार्ग पर चलने वाले ज्यादातर साधकों की साधना मामूली सिद्धियों तक ही सीमित रह जाती है। 20वीं सदी के उस महान संत की 133वीं जयंती (8 सितंबर 1887) पर प्रस्तुत है यह आलेख।      किशोर कुमार स्वामी विवेकानंद सन् 1893 में जब अमेरिका की धरती से पूरी दुनिया में योग और वेदांत दर्शन का अलख जगा रहे...

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October 3, 2021

बुद्धि सब कुछ नहीं, भावना प्रमुख है

परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती मनुष्य के जीवन में बुद्धि ही सब कुछ नहीं है। मानव जीवन में बुद्धि का अस्तित्व ज्ञान अर्जन के लिए है, निर्णय लेने के लिए है। साथ ही जिस ज्ञान को हम प्राप्त करते हैं, उसको अपने जीवन में उतारने के लिए है। अगर ज्ञान केवल बुद्धि तक ही सीमित रह जाए और जीवन में उतरे ही नहीं तो उस ज्ञान का कोई महत्व नहीं है। पर भावना बुद्धि से सूक्ष्म है। भावना मे विवेक का अंश नहीं होता। हम किसी से स्नेह करते हैं, तो करते हैं। प्रेम करते हैं, तो करते हैं। इसके पीछे कोई तर्क नहीं होता। इस बात को सम्राट अकबर और बीरबल के बीच के संवाद से समझा जा सकता है। सम्राट अकबर ने अपने दरबारियों के सामने इच्छा व्यक्त की कि वे दुनिया के सबसे खूबसूरत व्यक्ति को देखना चाहते हैं। दरबार में एक से बढ़कर एक खूबसूरत लोग थे।...

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तन-मन पर मंत्रों का प्रभाव

चेतना की विशिष्ट अवस्था में मंत्र की ध्वनि से शरीर के प्रमुख छह चक्र प्रभावित होते हैं। इनमें मूलाधार चक्र...

January 10, 2021 Kishore Kumar
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September 29, 2021

भारत में नौ फीसदी लोगों की मौत कैंसर हो जाती है। कैंसर के मरीजों की संख्या में...

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August 31, 2021

आजकल उपलब्ध सुसंगठित योग पुस्तकों में आसन प्राणायाम मुद्रा बंध को अंतर्राष्ट्रीय जगत में एक विशेष स्थान...

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April 5, 2021

संन्यास मुक्ति का मार्ग नहीं, बल्कि परोपकार का मार्ग है, साधु प्रकारांतर से परोपकार ही करते हैं : स्वामी शिवानंद सरस्वती

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March 15, 2021

ब्रह्म-विद्या और योग शास्त्र-सिद्धांत दोनों ही है श्रीमद्भगवत गीता

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किशोर कुमार   चिकित्सा विज्ञान ने भी बिहार योग या सत्यानंद योग का लोहा मान लिया है। इस योग के प्रवर्तक और बिहार योग विद्यालय के संस्थापक परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती के योग से रोग भगाने संबंधी अनुसंधानों को आधार बनाकर अगल-अलग देशों के चिकित्सकों व चिकित्सा अनुसंधान संस्थानों ने अध्ययन किया और स्वामी जी के शोध नतीजों को कसौटी पर सौ फीसदी खरा पाया। बिहार के मुंगेर स्थित विश्व प्रसिद्ध बिहार योग विद्यालय की स्थापना के 50 साल पूरे...

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भृगुसंहिता में कहा गया है कि नियति का निर्माण पहले “काल” में होता है। यानी घटना पहले “काल” में घटती है। उसके बाद अंतरिक्ष में। फिर “देश” में। योगेंद्र जी के जीवन में भी कुछ ऐसा ही हुआ। कैसे? पढ़िए विस्तार से।

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3011
2021

उसके बाद अंतरिक्ष में। फिर “देश” में। योगेंद्र जी के जीवन में भी कुछ ऐसा ही हुआ। कैसे? पढ़िए विस्तार से। उसके बाद अंतरिक्ष में। फिर “देश” में। योगेंद्र जी

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उसके बाद अंतरिक्ष में। फिर “देश” में। योगेंद्र जी के जीवन में भी कुछ ऐसा ही हुआ। कैसे? पढ़िए विस्तार से। उसके बाद अंतरिक्ष में। फिर “देश” में। योगेंद्र जी

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उसके बाद अंतरिक्ष में। फिर “देश” में। योगेंद्र जी के जीवन में भी कुछ ऐसा ही हुआ। कैसे? पढ़िए विस्तार से। उसके बाद अंतरिक्ष में। फिर “देश” में। योगेंद्र जी

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जब तुम्हें बताया जाए कि तुम अच्छे हो तो तुम्हें शिथिल नहीं होना चाहिए। बल्कि तुम्हें और अच्छा बनने की कोशिश करनी चाहिए। तुम्हारी लगातार उन्नति, तुम्हारे आसपास के लोगों को और ईश्वर को भी सुख प्रदान करती है।

परमहंस योगानंद