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योग की शक्ति से बेअसर होगा बुढ़ापे का असर

किशोर कुमार यह निर्विवाद है कि जो आया है सो जाएगा। पर बढ़ती उम्र के साथ शारीरिक या मानसिक समस्याएं कम से कम हो, ऐसी भला किसकी चाहत न होगी। पर योगमय जीवन के प्रति सजगता के अभाव में समय के साथ ही जिंदगी बोझ बनती चली जाती है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की “एल्डरली इन इंडिया 2021” रिपोर्ट के अनुसार, भारत की बुजुर्ग आबादी (60 वर्ष और उससे अधिक आयु) मौजूदा 138 मिलियन से बढ़कर सन् 2031 तक 194 मिलियन पहुंचने का अनुमान है। यानी एक दशक में 41 फीसदी की वृद्धि। इसके साथ ही चिंताजनक पहलू यह है कि बुर्जुर्गों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की दर भी तेजी से बढ़ रही है। इसलिए भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में बढ़ती उम्र के साथ ही योगमय जीवन की शुरूआत करने पर बल दिया जा रहा है। अनेक शोध नतीजों के आधार पर बतलाने की कशिश की जा रही...

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May 23, 2022

योग और स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती

किशोर कुमार अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस अगले महीने ही है। उसे व्यापक स्तर पर मनाने की तैयारियां जोर-शोर से की जा रही हैं। जोर इस बात पर है कि शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए योगाभ्यास किया जाना चाहिए। योग के जरिए ईश्वरानुभूति की बात आम आदमी के संदर्भ में बेमानी प्रतीत होती है, इसलिए यह मुद्दा गौण प्राय: ही है। पर बीसवीं सदी के महान संत स्वामी शिवानंद सरस्वती और योग की कुछ अन्य परंपराओं के साधक सदैव योग का अंतिम लक्ष्य ईश्वर-दर्शन मानते रहे हैं। आज भी स्वामी सत्यानंद सरस्वती, स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती, स्वामी नित्यानंद आदि योग परंपराओं में योग का महान लक्ष्य ईश्वरानुभूति ही माना जाता है।   चिन्मय मिशन के लिहाज से मई बड़े महत्व का है। इसलिए इस लेख में बात स्वामी चिन्मयानंद जी की और योग से संबंधित उनके कुछ विचार। बीसवीं सदी के महान संत स्वामी शिवानंद सरस्वती के शिष्य, हिन्दू धर्म व संस्कृति...

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तन-मन पर मंत्रों का प्रभाव

चेतना की विशिष्ट अवस्था में मंत्र की ध्वनि से शरीर के प्रमुख छह चक्र प्रभावित होते हैं। इनमें मूलाधार चक्र...

January 10, 2021 Kishore Kumar
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September 29, 2021

भारत में नौ फीसदी लोगों की मौत कैंसर हो जाती है। कैंसर के मरीजों की संख्या में...

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August 31, 2021

आजकल उपलब्ध सुसंगठित योग पुस्तकों में आसन प्राणायाम मुद्रा बंध को अंतर्राष्ट्रीय जगत में एक विशेष स्थान...

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April 5, 2021

संन्यास मुक्ति का मार्ग नहीं, बल्कि परोपकार का मार्ग है, साधु प्रकारांतर से परोपकार ही करते हैं : स्वामी शिवानंद सरस्वती

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March 15, 2021

ब्रह्म-विद्या और योग शास्त्र-सिद्धांत दोनों ही है श्रीमद्भगवत गीता

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किशोर कुमार   चिकित्सा विज्ञान ने भी बिहार योग या सत्यानंद योग का लोहा मान लिया है। इस योग के प्रवर्तक और बिहार योग विद्यालय के संस्थापक परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती के योग से रोग भगाने संबंधी अनुसंधानों को आधार बनाकर अगल-अलग देशों के चिकित्सकों व चिकित्सा अनुसंधान संस्थानों ने अध्ययन किया और स्वामी जी के शोध नतीजों को कसौटी पर सौ फीसदी खरा पाया। बिहार के मुंगेर स्थित विश्व प्रसिद्ध बिहार योग विद्यालय की स्थापना के 50 साल पूरे...

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भृगुसंहिता में कहा गया है कि नियति का निर्माण पहले “काल” में होता है। यानी घटना पहले “काल” में घटती है। उसके बाद अंतरिक्ष में। फिर “देश” में। योगेंद्र जी के जीवन में भी कुछ ऐसा ही हुआ। कैसे? पढ़िए विस्तार से।

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2706
2022

उसके बाद अंतरिक्ष में। फिर “देश” में। योगेंद्र जी के जीवन में भी कुछ ऐसा ही हुआ। कैसे? पढ़िए विस्तार से। उसके बाद अंतरिक्ष में। फिर “देश” में। योगेंद्र जी

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उसके बाद अंतरिक्ष में। फिर “देश” में। योगेंद्र जी के जीवन में भी कुछ ऐसा ही हुआ। कैसे? पढ़िए विस्तार से। उसके बाद अंतरिक्ष में। फिर “देश” में। योगेंद्र जी

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उसके बाद अंतरिक्ष में। फिर “देश” में। योगेंद्र जी के जीवन में भी कुछ ऐसा ही हुआ। कैसे? पढ़िए विस्तार से। उसके बाद अंतरिक्ष में। फिर “देश” में। योगेंद्र जी

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जब तुम्हें बताया जाए कि तुम अच्छे हो तो तुम्हें शिथिल नहीं होना चाहिए। बल्कि तुम्हें और अच्छा बनने की कोशिश करनी चाहिए। तुम्हारी लगातार उन्नति, तुम्हारे आसपास के लोगों को और ईश्वर को भी सुख प्रदान करती है।

परमहंस योगानंद